एहसास

हमारे करम कि नज़रें उठाईं,

उठा कर गिराईं, मगर फिर उठाईं,


मुहब्बत की बातें  मुद्दत के बाद, 

मेरे सनम हमें समझ आईं/

हमारे करम कि———

झिझकना तेरा, सिमटना तेरा,

चुपके से आके लिपटना तेरा,

होठों की जुंबिश और आखों की थिरकन,

अर्से से थी मेरे दिल में समाईं/

हमारे करम कि——-

वफा की कसमें, मुहब्बत के वादे,

आज की शब कोई कैसे भुला दे,

तरन्नुम मेरे गीतों की तुम हो,

तुम ही हो मेरे दिल की रुबाई/

हमारे करम कि——-

आकाश

आकाश

कितना सहृदय है ,

उसे

कितना कुछ कहो,

सुनाओ,

प्रताड़ित करो,

चुपचाप

समेट लेता है अपने में।

लेकिन

आकाश पर थूको      –

——-?

 

 

जीवन

जीवन अपूर्ण कामनाओं का सागर, कभी भावनाओं का उद्वेग, तो कभी सम्पूर्ण विरक्तता। एक अनिश्चित सीमा, दूर दूर तक छोरहीन, अनुपम द्वीपों से पड़ाव, अंजान रास्ते, उदास थपेड़े। बस गर्भ में ही समेटे हुए, अमूल्य …

Source: जीवन

जीवन

जीवन

अपूर्ण कामनाओं का सागर,

कभी भावनाओं का उद्वेग,

तो कभी सम्पूर्ण विरक्तता।

एक

अनिश्चित सीमा,

दूर दूर तक छोरहीन,

अनुपम द्वीपों से पड़ाव,

अंजान रास्ते, उदास थपेड़े।

बस

गर्भ में ही समेटे हुए,

अमूल्य रत्न,

जो पैठे, सो पा ले,

अन्यथा भटकन, अंधकार और दिशाहीनता।

ख़त

मेरे दोस्त

यूं ही

मेरा मज़ाक उड़ाया करते थे

जब मैं हर एक का ख़त

संभाल कर रखता जाता था

पर आज

वो क्या जानें

कि वही ख़त

पढ़ पढ़ कर मैं

उदास वक़्त काटता हूँ।